Mari Gazal Ma Roj Evi Vaat Ave Che Gazal By Naresh K. Dodia

Mari Gazal Ma Roj Evi Vaat Ave Che Gazal By Naresh K. Dodia
Mari Gazal Ma Roj Evi Vaat Ave Che Gazal By Naresh K. Dodia


मारी गझलमा रोज एवी वात आवे छे
जेमा तने गमती बधी रजुआत आवे छे

तारी ज चाले छे रियासत आ ह्रदय पटमां
कहे दी तो दी,कहे रात त्यारे रात आवे छे

धरती रहे तुं मौन तारा खूबसूरत च्हेरे
तेथी ज तो अक्षरो मही ताकात आवे छे

मध्या बनी छे तोय मुग्धा जेम वर्ते तुं
ए जोइने आंनंद मने नितांत आवे छे

तारी ज वातोने हुं अक्षरोमा उतारूं तो?
मारी गझलमा फूलनी कै भात आवे छे

भरपूर चोमासा समी वरसी पडे त्यारे
तारी अदामां वीजळीनी नात आवे छे

म्हेफीलमां हुं शेर तारा नांमथी बोलुं
सौनां ह्रदयमां एक झंझावात आवे छे

मारी “महोतरमांनी” चाहतनी कदर छे त्यां
ज्यां मावजतनी अवनवी सौगात आवे छे
-नरेश के.डॉडीया

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