हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते Gazal By Gulzar

हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते  Gazal By Gulzar
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते  Gazal By Gulzar  
हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते 
वक़्त की शाख़ से लम्हें नहीं तोड़ा करते

जिस की आवाज़ में सिलवट हो निगाहों में शिकन 
ऐसी तस्वीर के टुकड़े नहीं जोड़ा करते

शहद जीने का मिला करता है थोड़ा थोड़ा 
जाने वालों के लिये दिल नहीं थोड़ा करते

तूने आवाज़ नहीं दी कभी मुड़कर वरना
हम कई सदियाँ तुझे घूम के देखा करते

लग के साहिल से जो बहता है उसे बहने दो 
ऐसी दरिया का कभी रुख़ नहीं मोड़ा करते
- गुलजार  
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