Khobo Bhari Ne Matra Taru Vahal De Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

Khobo Bhari Ne Matra Taru Vahal De Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
Khobo Bhari Ne Matra Taru Vahal De Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
खोबो भरीने मात्र तारुं व्हाल दे
आखु जीवन ना दे तुं तारी आज दे

मारी गझलना शब्द नीमाणा बन्यां
तारा ह्रदयथी एक साची दाद दे

काचो पड्यो छु लागणीनी बाबते
तारी हुंफाळी मावजत श्रीकार दे

सुंदरतानुं अभिमान करशे क्यां लगी?
आत्मानी सुंदरतानो तारो झाग दे

अवढवमाथी तु ब्हार आवी क्ही दे आज
तारो छुं एवी शक्यताने धाट दे

जेवी हती एवी ज सामे आवजे
बदलावने फेकी जुनो ए प्यार दे

मारी मुसीबत दूरतां तारी बनी
शब्दोना देहे एकतानो भाव दे

पीडा हुं सधळी भोगवी लेवानो छुं
कायम खूशी आपी शकुं ए छाब दे

तुं रूबरू ज्यारे मळी ए यादने
कायम ए ताजा रही शके ए चार्म दे

जेवी गुजारी साथमां बेउ ए रोज
मारी “महोतरमां” फरी ए सांज दे
-नरेश के.डॉडीया

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