Kyarek Tari Ankh Ma Dariyo Uchadto Hoi Che Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

Kyarek Tari Ankh Ma Dariyo Uchadto Hoi Che Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
Kyarek Tari Ankh Ma Dariyo Uchadto Hoi Che Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia


क्यारेक तारी आंखमां दरियो उछळतो होय छे,

क्यारेक खारा पाट जेवा रणनो रस्तो होय छे


झाकळ समी अडकी जती,हुं फूल थइ खीली जतो

संबंध एवो भर बपोरे हुं तडपतो होय छे


जीवी शके छे प्यार मबलख मेळवी लीधा पछी

माणस वितेला सौं प्रसंगोमां रखडतो होय छे


मरती नथी संवेदनानी पळ ह्रदयमां कोइनां

माणस पछी एनां ज नामे काव्य लखतो होय छे


जेनी वसाहत आंखथी आघे छतां अडवुं गमे

एनुं छबीमां स्मित जोइ माणस हसतो होय छे


कोइना प्यारा थइ जवुं आसान थोडुं छे अही

सौने ए देखाडी ना शके ए धाव गणतो होय छे


नौका डुबे तो वांक दरियानो ज काढे छे बधां

कोइनी आंखोमां खुद समंदर भटकतो होय छे


चाही छे जीवन-भर “महोतरमांने” खुदथी पण वधुं

ए मानवी अभिमान एनुं लइ मलकतो होय छे.
-नरेश के.डॉडीया
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