तारी आंखो हवे बहुं बोले छे Gujrati Kavita By Naresh K. Dodia

तारी आंखो हवे बहुं बोले छे Gujrati Kavita By Naresh K. Dodia
तारी आंखो हवे बहुं बोले छे Gujrati Kavita By Naresh K. Dodia
तारी आंखो हवे बहुं बोले छे
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तारा मोकलावेलां असंख्य फोटोने
मारा मोबाइलनी हाइड गेलेरीमां
में छुपावीने राख्या छे..
एक दिवस तारा एक पछी एक फोटो
जोतो हतो त्यारे मने शुं सुज्यु.

मे तारा तमाम फोटोने क्रोप करीने
फकत तारी बे कजरारी आंखो देखाय एवी रीते
एक अलग आल्बममां सेव कर्यां
कारणके एक स्त्रीने नखशीख वारमवार निहाळवी
एक पुरुषने बहुं गमे छे…

एमां पण इश्वरनी बेनमुन सर्जन समी
तारी शरीरनी रचनां अने
धवलश्यामां जेवी त्वचानी जाहोजलाली
जोइने एक ज शब्द नीकळी पडे
“जल्वारेज हुस्न की मालकिन”

पण खबर नही “महोतरमां” !!!
आ बंदानुं दिल अने नजर बंने
तारी आंखोमां एवां गुम थइ गया के
हवे खुदने शोधवां दररोज मारे
तारी आंखोनो प्रवास करवो पडे छे
-नरेश के.डॉडीया


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