तुं नथी तो याद तारी चो-तरफ अथडाय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

तुं नथी तो याद तारी चो-तरफ अथडाय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
तुं नथी तो याद तारी चो-तरफ अथडाय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
तुं नथी तो याद तारी चो-तरफ अथडाय छे
साव खाली ओरडे पडधो बनी पडधाय छे

रोज रस्ते राहदारी जोइने थाक्यो छुं हु
एक सरखा माणसो जोइ नजर शरमाय छे

कोइनी अणसारमां तारो इशारो ना मळे
मात्र वरतारो मने चारे दिशा वर्ताय छे

तुं भूली गइ छे हवे यादोमां खळभळवुं हवे
ने अहीया यादना भारणमां पळ धरबाय छे

आंखनो मारो धरम छे ताकवी तारी छबी
रोज अपलक जोंउ पण तुं क्यां हवे मलकाय छे

थाय छे शुं?ने थशे शुं? ए विचारो रोजनां
एक नक्कर सत्यथी तकरार कायम थाय छे

रोज पडखा हुं बदलतो उंधमां ने जगतां
आ पथारीनी सळॉमां कामना कचराय छे

मारुं अडधुं अंग मारी आंखथी आधे वसे
एक तारा स्पर्श काजे आयखुं आ जाय छे

तुं जवाबी कार्यवाहीथी कां गभराती रहे?
शब्द मारा काव्यनी सतहे सतत छलकाय छे

तुं नथी मारी छतां तने हथेळीमां भरू
हाथमा आवे छतां तुं कयां हवे पकडाय छे

दूरतानुं एक कारण तु जणावे तो कहुं
ने तुं”कहुं”बोली अचानक दूर जइ हरखाय छे

बस करो प्यारी “महोतरमां” तमारी आ रमत
दाव हारेला जुगारीथी हवे क्यां जीताय छे
-नरेश के.डॉडीया
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