ओ,झाकळ क्यां सुधी तुं सूर्यथी बचती रहेवानी Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

ओ,झाकळ क्यां सुधी तुं सूर्यथी बचती रहेवानी  Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
ओ,झाकळ क्यां सुधी तुं सूर्यथी बचती रहेवानी  Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia        
ओ,झाकळ क्यां सुधी तुं सूर्यथी बचती रहेवानी         
बपोरे श्वासनां बंधनमाथी छुटती रहेवानी              
      
बधां पंखीओने डाळॉ कदी गमती नथी मळती
घणा धरनां छजे टहुकाओनी मस्ती रहेवानी

बगीचामां हवे कोइने फरवानुं नथी गमतुं
फलावरवाझमां खूश्बू नकल करती रहेवानी

अमारी आंखने आ पानखर क्यारेय ना अडकी
विरहमां आखं साथे आंसुनी वस्ती रहेवानी

अमारा टेरवाने एक आदत मात्र तारी छे
हवे त्यां कांयमीना झंखनां उगती रहेवानी

सतत ज्यां खालिपानुं राज चाले आभमां,तेथी ज
आ धरती पर सतत जोडी नवी बनती रहेवानी

अमारा छो ए साबित करवानुं क्या जरूरी छे?
घडकता दिलमा कायम प्रेमनी तख्ती रहेवानी

सतत लडवानु आव्युं एकलाने केम तुं समजाव?
सहीयारी ए सघळी सांज बस पडती रहेवानी

करे छे शायरी जे मानवी आं प्रेमनां नामे 
“महोतरमां” आ शायर दिलमां कलरवती रहेवानी
-नरेश के.डॉडीया
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