में जब छोटा था तब मैने एक परिंदे को पहेली बार छुवा था Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

में जब छोटा था तब मैने एक परिंदे को पहेली बार छुवा था Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
में जब छोटा था तब मैने एक परिंदे को पहेली बार छुवा था Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
में जब छोटा था तब मैने एक परिंदे को
पहेली बार छुवा था
वोह कुछ सहेमां सा,
थरथरा रहा था 
उन को छुते ही मेरे हाथो में
पहेले कभी महेसुस नही कियां हो
ऐसा नाजुक और मुलायम
एहसास हो रहा था

जब में बडा होकर जवान हो गया
वोह मुजे पहेली बार मिली थी
मुजे वोह बचपनवाला एहसास फिर से
याद आ गयां

मैने उन को पहेलीबार छुवां था
लेकिन…….लेकिन्

यह एहसास परिंदो को छुने से
ज्यादा…….कुछ ज्यादा

नाजुक,नजाकती,मखमल से मुलायम
एहसास था

वोह भी परिंदे की तरह थरथरा रही थी
और सहेमी सी थी
लेकिन……लेकिन

यह परिंदा डर के मारे शरमां रहा था
यां शरम के मारे डर रहां था

पतां नहीं इन्सानी औरत और परिंदो
में कुछ तो है

जो इन की बदोलत दुनिया इतनी
खूबसूरत और रंगो से भरपूर नजर आती है
- नरेश के.डॉडीया
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