पाथ खरबचडॉ हशे,पण चालवानुं होय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

पाथ खरबचडॉ हशे,पण चालवानुं होय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
पाथ खरबचडॉ हशे,पण चालवानुं होय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
पाथ खरबचडॉ हशे,पण चालवानुं होय छे
होय संगाथी जो मुलायम,तो जवानुं होय छे

स्थान गमतुं छोडवाना ख्यालथी थरथरवुं शुं?
कैं नवुं जोवा जुनुं पण छोडवानुं होय छे

उंबरानो क्यां मलाजो राखवानो होय छे?
मानवी मन जोइ,घरमां घूसवानुं होय छे

राइ जेनी कोइ माने ना, छतां ए आपशे         
कोइ पण घटना विशे बस बोलवानुं होय छे       

साव एंकाकी जीवन जीवीने शुं करवुं अहीं?
एक दिलने सौनी वच्चे बांटवानुं होय छे

फेरवी ले आंख तो शुं रंज करवानो भलां
चारमांथी बे नयनने जागवानुं होय छे

द्रार सघळा बंध भाळी ना कदी पाछो जतो         
बारणाने बदले बारीमां ताकवानुं होय छे

शुं उपरवट कोइनी जइए अमे शायर बनी
बस अमारूं काम उर्मि व्हेचवानुं होय छे        

हुं तमारी मनसूफी मूजब नही चाली शकुं      
घर तरफ क्यारेक पगने वाळवानुं होय छे
-नरेश के.डॉडीया
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