जे दिवसथी जात मारामां मूकीने गइ छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

जे दिवसथी जात मारामां मूकीने गइ छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
जे दिवसथी जात मारामां मूकीने गइ छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
जे दिवसथी जात मारामां मूकीने गइ छे
ए पळे सुखचेन मारा तुं लूटीने गइ छे

रात आखी जागवानी ते सजा आपी छे
मारी आंखोमा ए रीते तुं खूपीने गइ छे

रण समुं तपतुं ह्रदय झंखे छे बुंदो जळनी
वादळीनी जेम ऊपरथी उडीने गइ छे

वेदना उत्सव समी उजवुं छु शब्दो प्हेरी
एक मौसम जेम मुजने ऊजवीने गइ छे

कोइ पण कारण विनां मळवा तुं आवी जाती
ए ज मळवानी रसम सारी भूलीने गइ छे

जीरवुं छुं मौनना आधातने चुपकेथी
शब्दनां संवाद वच्चे तुं डुबीने गइ छे

आपणे पाछा मळीशुं ए वचन दइने तुं
स्पर्शनी शाखे सजळ नेत्रे उठीने गइ छे

चोतरफ मारी महोतरमां ज देखाइ छे
अष्ट कोणे आंखनां द्रश्यो भूसीने गइ छे
-नरेश के.डॉडीया
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