श्वासमां मारा वसंतो जेम फेलाय छे तुं Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

श्वासमां मारा वसंतो जेम फेलाय छे तुं Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
श्वासमां मारा वसंतो जेम फेलाय छे तुं Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia   

श्वासमां मारा वसंतो जेम फेलाय छे तुं    
पानखर अडकी शके नां एम धरबाय छे तुं

हेत अमथुं जोइने कोइने उभरांतुं नथी
हाथ अमथो में पकड्यो त्या ज शरमाय छे तुं

जिंदगीमां रोज रेलमछेल आवी क्यां हती?
लागणीनां नामथी दररोज खर्चाय छे तुं

                          शब्दथी संगाथ तारो ज्यारथी मुजने मळ्यो                            
एटले मारी गझलमां रोज चर्चाय छे तुं

रूबरू आवी अचानक केम गायब थइ हती?
एक सपनां जेम रात्रीनां ज अडकाय छे तुं

मात्र तुं ने तुं मने कां चो-तरफ देखाय छे तुं?
आंखमां लगवुं बनीने केम बंधाय छे तुं?                            

आ मिलननो मात्र कायमनो सहारो होय जो?
दिलमां तारा स्थान आपी केम गभराय छे तुं?

कोइ तो विकल्प होवो जोइए यारा हवे            
यादनां नामे "महोतरमां" बनी अथडाय छे तुं
-नरेश के.डॉडीया
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