एक समये ज्यां मारा बोलका मौननी गजबनी बोलबाला हती Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

एक समये ज्यां मारा बोलका मौननी  गजबनी बोलबाला हती Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
एक समये ज्यां मारा बोलका मौननी  गजबनी बोलबाला हती Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
एक समये ज्यां मारा बोलका मौननी 
गजबनी बोलबाला हती
त्यां आजे एक शांत खामासीए 
अजगरनी जेम भरडॉ लीधो छे
एक समये 
घरनां खूणे खूणे अमारी चार आंखो वच्चे
आखोनी भाषानुं चलण 
खानगी धोरणे चालतुं हतु..

आजे त्यां चार आंख सामे थतां
बे आंखोंनां पोपचा अजाण्या थइने
पोतानी दुकान बंध करी दे छे.. 

आखो दिवस साथे लइने फरती हती
आजे ए उंमंग अने उत्साहने
मारी मोंधी साडीओनी गडीओ वच्चे
छुपावीने साचवी राख्या छे.

आखा धरमां मारा पगले पगले
मारी पायलनी जेम मारा रणकतां 
अस्तित्वनो धमधमाट रणझणतो हतो,

आजे आहट ना थाय 
ए रीते रसोडाथी लइने बहार बगीचा सुधी
पगलानी सगड भूसीने फरती रहुं छुं..

एक लाबां अरसानां सगवडतां भर्या
धरथी लइने संबंध साचवानी
एक भारी किमत में चुकववी छे 
एक पुरुष पोतानां खानगी संबंध अने
एने अंतगर्त पराक्रनी वात सराजहेर 
मित्रो वच्चे गर्वथी कही शके छे
प्रियतमानी वातो कविओ अने शायर 
बिन्दास्त लखीने वाह वाह अने ताळीऑ
मेळवता रहे छे. 

मारा ह्रदयनां खूणे लागणीनां
सीचनथी पांगरेली मैत्रीनी कृपण फूटी
ए धटनाने कागळ पर उतारी ना शकी
परिणामे ए घटनां होठो पर आवी गइ
ना तो मने वाह वाह मळी 
ना तो मने ताळीओनो गडगडाट संभळायो

बस मने मळी तो शांत अवहेलनां
संवादनुं सिमित सांनिध्य 
अने भारेखम मौन अणगमाथी मढेलुं
भूतकाळनां एक वाचाळ चहेरानुं नवु स्वरूप 
हवे बेडरूममां बे जाणीता माणसो
एक ज बेड पर सुवे छे,
बे अजाण्या मुसाफरनी जेम 
जेनी भूतकाळमां मंजील एक हती.

हवे ए मुख पण सामे राखीने सुइ नथी शकता
भलेने उंधमां बंध आंखोए एक बीजाने जोइ शकता नथी
-नरेश के.डॉडीया
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