मारे टुटवुं नहोतुं,कोई सूकायेली डाळनी जेम, Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

मारे टुटवुं नहोतुं,कोई सूकायेली डाळनी जेम, Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
मारे टुटवुं नहोतुं,कोई सूकायेली डाळनी जेम, Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
मारे टुटवुं नहोतुं,कोई सूकायेली डाळनी जेम,
मारे सळगीने राख नहोतुं थवुं,सुकायेला
झाडना थड जेम,
मारे डुबवुं नहोतुं,छीद्र थयेला मधदरिये सपडायेला वहण जेम,
मारे चकचूर थईने ढळी नहोतुं पडवुं एक शराबीनी जेम,
मारे वळगी नहोतुं पडवुं एक थडने विटळायेल वेलानी जेम,
मारो कयारेय एवो आशय नहोतो कविता,
गझल हुं लखुं एक कविनी जेम,

पण तुं ज्यारथी
जीवनमां आवी…
आवी असंख्य प्रतीज्ञाओ भूलीने
बस तारामय बनीने हुं…

तारा प्रेममां रीतसरनो टुटी गयो
तारा विरहनी आगमां बळीने खाख थइ गयो
अने तारा विचारोने हुं एक वेलानी जेम वळगी पडयो
अने डुबी गयो तारा प्रेमनां विशाळनां दरियामां
अने तुटेली नाव जेवो तळीये पड्यो छु..

अने चकचुर बनी गयो ज्यारे प्रत्यक्ष ज्यारे मळ्या त्यारे
तारी आंखोनां शराबखानां एक शराबी बनीने ढळी पड्यो

अने छेल्ले…
जेने शब्दो साथे बारमो चंद्रमां हतो आजे
एने ते एक कवि अने शायर बनावीने
उर्मिओनां विशाळ ब्रह्मांडमां तरतो मुकी दीधो

जे हवे चोवीस कलाक फकत तारा विचारोने
फरतां गोळ चक्कर लगाव्या करे छे..
-नरेश के.डॉडीया

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