दादा…..लव युं…Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

दादा…..लव युं…Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
दादा…..लव युं…Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
शीयाळॉ,उनाळॉ,चोमासुं
एम त्रणेय मौसमने घणा वर्षोथी जेलती आवती
दिवाल पर लटकेली छबी आजे घणा वर्षो पछी
आप मेळे खीटी सहीत नीचे पटकाय पडी

जमीन पर पडेली छबीमांनो माणस
जर्जरीत दिवालो सामे जोइने
कंइक कहेतो हतो के

“जीवतो हतो त्यारे पण आ घरमां
मांड मांड सचवायो हतो अने अंतमां
छबी थइने दिवाले लटकी गयो
अने अस्थि मारा गंगामां भटकी गया.

एक मरेला माणसनी छबीने
निर्जिव दिवाल पण
साचवी शकती नथी

तो जिवता माणसने
बीजो माणस साचवी ना शके तो
एमां ए माणसनो वांक नथी

त्यां अचानक एक युवाने
आवीने ए छबीने उपाडी लीधी

ए छबी परथी धुळ साफ करीने
छबीने व्हालथी बची भरीने कह्युं

दादा…..लव युं…..

घरमां कोइ तमने याद नथी करतुं
पण हुं रोज तमोने कोलेजथी आवुं
त्यारे याद करूं छु

अने पछी तमारी आराम खुरशी पर
बेसीने जुलतो रहुं छुं
-नरेश के.डॉडीया
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