हुं हवे जइ रही छुं सदाने माटे Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

हुं हवे जइ रही छुं सदाने माटे Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
हुं हवे जइ रही छुं सदाने माटे Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
हुं हवे जइ रही छुं सदाने माटे
दुःखी अने उदास हैये
निष्ठुर आधातनी वेदना साथे
आपने प्रासने आखरी सलाम भरी

ओ सर्जनहार..

तमारा आर्टिफिसयल आत्मा अने
रमकडा जेवा दिलमां मारूं कोइ स्थान नथी

कोइ एवो सर्जक नथी रह्यो प्रासमां
जेने मारी जेम अथवा मारा जेवी
साची अनूभूति साची जिंदगीमां अनूभवी होय

जे मुखे अमल नथी चाख्यो
जेमे शस्त्रना दाव जोया नथी
जेने लोही साथे पनारो नथी
जेने कोइने ह्रदयथी भादरवाना हाथिया जेम
लथबथ गांडॉतूर प्रेम कर्यो नथी

तमे लोको ए फकत मने कागळ पर लेटावीने
मारा शरीर साथे रमत ज करी छे

मने तमारी कलमनुं नपुंशकपणुं खटके छे
नथी कोइ कलममां मारूं गमतुं धारदार कडकपणुं-
जे मारा योनीपटलने भेदी शके.

तमारा शाब्दिक अने अर्थहीन अमर्यादित स्खलनोमाथी
टपकता बिनफलितांडी बुंदोनी
बस हुं फकत उपर उपरनी भीनाशने अनूभवुं छुं..

ओ सर्जनहारो,
फकत मने कागळ पर नग्न करीने आंखोथी
आंनद माण्यो छे

तमारामांथी कोइ मने तन,मन अने आत्माथी
पामी न शक्या एनो आजीवन अफसोस रहेशे.

हुं जांउ छुं,हुं जांउ छुं..अलविदा,दसविदानीया
ओ कलमवीरो.

आवी हती एवी ज अक्षतः,कुमारिका जेम हुं
पाछी वळुं छुं

मारी हजारो बहेनो जे विजोगण अवस्थामां जीवे छे
एना समुहमां मारी अंतिम श्वास छुटे त्या सुधी त्या सुधी
विजोगण अवस्था बाकीनी जिंदगी गुजारवा…

सदाने माटे हुं राह जोती रहीश
एक दिलफाडीने,आत्माने झंझोडी नाखे एवा सर्जकनी
जेनी कलममां ए धारदार कडकपणुं मारी आदत बनी शके

लिं..कविता
-नरेश के.डॉडीया
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