“एकलोती एकलतानो वारसदार” Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

 “एकलोती एकलतानो वारसदार” Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
 “एकलोती एकलतानो वारसदार” Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
जिंदगीनां संबंधनां तख्ता पर ज्यारे
आपणे बंने बे प्रेमी पात्रो तरीके मळ्या हतां

त्यारे तख्तां पर तारा आगमननी साथे
एक ज संवाद गुंजतो हतो
“क्यां छे तु….क्यां छे तुं….क्यां छे तुं…”

अने अचानक हुं “हाइ…महोतरमा..” कहेतो
बेकस्टेजमांथी तारी सामे आवतो हतो,

त्यारे तारी आंखोमां एक अलायदी चमक आवी जती
त्यार बाद आपणे बंन्ने मंजायेला कलाकार जेम
प्रेमनां संवादोनी झडी वरसावी देता हता..
कोइ पण स्क्रिप्ट विनां ए संवादो पूरा ज थतां नहोता.

घणा वरसो पछी तारा जवांथी
द्रीपात्रीय अभिनयनां
तख्तानां प्रायोजन बदल्यु अने
एकांकी अंकमां परिवर्तित थयुं

आजे आ तख्तां उपर एकांकी अभिनय करतो
मात्र हुं बच्यो छु..मौननो मुखवटो धारण करीने
कोइनां जवांथी संवांदो तो ठीक वांचा पण हणाइ गइ छे
एटले हवे हुं शब्दो रूपे आ तख्ताने जींवत राखवानी
लगातार कोशिश करुं छु

महोतरमा,
हवे लोको आ अंकने एक नवां नामे ओळखे छे

“एकलोती एकलतानो वारसदार”
-नरेश के.डॉडीया

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