एक बाळकना ह्रदयनी वात जाणे जाणवानी होय छे Gujrati Gazal By Naresh K. Dodia

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एक बाळकना ह्रदयनी वात जाणे जाणवानी होय छे Gujrati Gazal By Naresh K. Dodia
एक बाळकना ह्रदयनी वात जाणे जाणवानी होय छे
एवी समजण आपणा मनमा बधाए बांधवानी होय छे

जे अहमनो संग छोडी ना शके एवा जगतमां छे घणा
जात एने सींदरीनी जेम जाते बाळवानी होय छे

माणवानी होय तो रणमा पडी रंगत पण माणी शको
थोर के बावळ..जरूरत तो रणमा पण झाडवानी होय छे

अंजपो लइ रात भर लखता रहे छे एने पुछो तो जरा
आग दिलमा लागे त्यारे कोइ रीते ठारवानी होय छे

माणवानी होय एवी क्षण बधानां क्या नशीबे होय छे?
धारणा एवी घणी छे मात्र एने धारवानी होय छे

पूजवानां होय एनां तुं चरणने चूमी लेजे बे-जीजक
मानवीने ज्यां खुदा जेवी गणी ने पूजवानी होय छे

आपवानी वात ज्या आवे,कदी आनाकानी ना होय त्यां
ज्यां मगजनी वातने बदले ह्रदयनी मानवानी होय छे
-नरेश के.डॉडीया
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