मारी उदासीनो कायमी विस्तार वधतो जाय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

मारी उदासीनो कायमी विस्तार वधतो जाय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
मारी उदासीनो कायमी विस्तार वधतो जाय छे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
मारी उदासीनो कायमी विस्तार वधतो जाय छे 
एनी कमीनो भाव मारा दिलमां भळतो जाय छे

मारी बुलंदीनी कदी परवा नथी करतो भला 
एना चरणमा अंह मारो रोज नमतो जाय छे

एवा किनारा जेम मळवानुं अने खळभळवांनुं
डीवाइडरनी बेउ साइड जेम रस्तो जाय छे

जे आयनामा काल लग जोतो हतो मारी नकल 
ए आयनो मुजनी असल प्हेचान धरतो जाय छे

आजे हुं ज्या छुं त्या हवे बीजो रचयता आवशे
दुनियामां आ धारो बधाने लागुं पडतो जाय छे

एनी मुसीबतनुं कदी कारण नही बोली शके
ए शब्द साथे भेद जेवुं कैक लखतो जाय छे

आखुं जगत फरतो रह्यो त्यारे मळी छे तुं मने
मारी गझलमां प्यार तारो रोज सजतो जाय छे

कीबोर्ड साथे टेरवानो एक नातो जो थयो 
बे देश वच्चे दूरतानो व्याप घटतो जाय छे

मारी"महोतरमा" बनावी ते पछी धटना घटी
रचनाओ नवतर एक शायर रोज रचतो जाय छे
-नरेश के.डॉडीया
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