थाय पीडा भीतरे तो काव्य गझलो लखवा पडे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

थाय पीडा भीतरे तो काव्य गझलो लखवा पडे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
थाय पीडा भीतरे तो काव्य गझलो लखवा पडे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
थाय पीडा भीतरे तो काव्य गझलो लखवा पडे
दर्द हदथी ज्यां वधे तो शब्दने चोपडवा पडे

जाणतल थइने जगतमां कोइ माणस आव्यु नथी
मानवीनां मनने मानद ग्रंथ मानी पढवा पडे

हु निराकारी छुं एवो भ्रंम भांगी नाख्यो हवे
खुदनां दिलमां कोइ बीजा मानवी संधरवा पडे

राहबर एवा मळ्या जीवन सफरनां रस्ते जता
सांज पडता केटलां ओछा थया ए गणवां पडे

आ ह्रदय व्याकुळ बने छे एक माणसने कारणे
द्रश्यनां रस्ते नयनने ख्वाबना रण वटवां पडे

प्रेमनी भाषामां रणके एक टहुको यायावरी
पानखरनां रंग त्यारे वांसतीमां गणवा पडे

पूण्यशाळी जीव होवो जोइए जेने चाहुं छुं
शब्दने पावक प्रसादी रूपमां पीरसवां पडे

ए “महोतरमानी” माया छे अगोचर दुनिया समी
लाख मानूनीओ वच्चे आंखने ए गमवा पडे
-नरेश के.डॉडीया

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