तुं मारामां कदी आगळ वधी खुदने समावी दे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

तुं मारामां कदी आगळ वधी खुदने समावी दे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
तुं मारामां कदी आगळ वधी खुदने समावी दे Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
तुं मारामां कदी आगळ वधी खुदने समावी दे
नदी जेवी फरज मानी तुं मारामां वळावी दे

बतावी दे तुं दुनियाने अलग तारामां छे एवुं
जगतमा सत्यथी पर प्रेम छे एवुं जतावी दे

जगत माने नही जे तुं खरा दिलथी लखे छे रोज
जे तारुं सत्य छे ए एक माणसने जणावी दे

जे बहेरा कान ने रंताधळी आंखो धरावे छे
ए लोकोने कविताना रवाडे तुं चडावी दे

जो लगवा जेम आदत एक माणसनी पडे त्यारे
तुं एने कायमीनुं तारुं सरनामुं लखावी दे

ह्रदयना बागमां फूलो उगाडी राखजे कायम
तु माळी भाव तारी जीभ पर कायम सजावी दे

कदी गीताने वांचो तो कदी माणसनुं मन वांचो
भणीने जे मळ्युं नहि ज्ञान ए तमने पढावी दे

“महोतरमां” छे तो समजी शकुं छुं प्रेमनी दुनिया
ए चोकट एक एवी छे जे सर मारुं जुकावी दे
-नरेश के.डॉडीया
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