हु प्रवासी मात्र तारा एकांतमां छुं सदा Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

हु प्रवासी मात्र तारा एकांतमां छुं सदा  Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
हु प्रवासी मात्र तारा एकांतमां छुं सदा  Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
हु प्रवासी मात्र तारा एकांतमां छुं सदा 
पण विचारोमां दिवस साथे रातमां छुं सदा 

भीड प्हेरी छे सतत एकलतानी वच्चे सतत   
हुं स्मरणना एकलोता आधातमां छु सदा 

धारणा अटकळथी आगळ एवुं घणुं होय छे
रोज तारा मननी नवतर रजुआतमां छुं सदा 

वीजळीनां नाद साथे वरसाद जेवो छुं हुं   
शब्द साथे कायमी झंझावातमां छुं सदा 

तुं पूराणी ए बधी वातोने भूली जा हवे 
सौने माफक होय एवी औकातमां छुं सदा 

रोज प्हेरण जेम प्हेरी फेको ना मुजने कदी 
छुंदणाना मोरनी माफक भातमां छुं सदा 

रोज पीगळवानी धटना जेवुं बने छे अहीं
फूल जेवी तुं ने हुं झाकळ जातमां छुं सदा 

ए”महोतरमां”मळे त्यारे शब्द फूटे मने  
ए पछी लागे के मारी वीसातमां छुं सदा 
-नरेश के.डॉडीया
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