प्राणवायुनी जेम तारी ज जरूरत होय छे Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

प्राणवायुनी जेम तारी ज जरूरत होय छे Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
प्राणवायुनी जेम तारी ज जरूरत होय छे Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
प्राणवायुनी जेम तारी ज जरूरत होय छे
ज्यारे मारा श्वासोश्वास थकी मारा जीववानी
अने मारा अस्तित्व टकावी राखवानी हर क्षणमां   

तुं एक बे क्षण माटे माराथी आधी पाछी थाय छे
त्यारे मारी हालत शुं थती हशे..?

तारा धबकतां ह्रदयने अने एमां धबकती हर एक
घडकननेने पुछजे तो खबर पडशे तने..      
अने एकी सामटी तने बाझी पडशे अने कहेशे!

"एटलो तो विचार करो महोतरमां
वेन्टीलेटर पर जीवता कोइ माणसनुं
कोइ ओकसीजन मास्क काढी ले तो
एनी शुं हालत थती हशे..?"

बस तो आवुं ज कंइक तमारा विना एनुं थतुं हशे?
कोइने जीवाडवा माटे जीववुं
ए ज तो प्रेम छे व्हाली महोतरमां
-नरेश के.डॉडीया
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