“चाल,फरी मळीशुं,कयारेक अनायाशे,आ रीते अचानक” Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

“चाल,फरी मळीशुं,कयारेक अनायाशे,आ रीते अचानक” Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
“चाल,फरी मळीशुं,कयारेक अनायाशे,आ रीते अचानक” Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
निष्पलक नयने हुं तने फकत निहाळ्या करतो हतो
तुं तारा वाळने थोडा पाछळ धकेलशे
मने खबर छे!आ तारी मनगमती क्रिया छे
खास करीने ज्यारे हुं तने पगथी माथा सुधी

ज्यारे ज्यारे निहाळतो हतो
पछी तुं नजरने नीची ढाळशे,
थोडा थोडा अंतरे डाबा पगने जमणा पग पर
अने जमणा पगने डाबा पग पर राखशे
तारी आ क्रियां खास मने गमती हती 

जिंदगी सरळताथी वितती जाय छे,तुं चालीसीने वटी गइ  
अने हुं तारा करतां बे वर्ष नानो
पण हजुं तुं त्रीसथी पांत्रीसनी धारी शकाय एवी लागे छे
हजुं तो आपणे मळ्या एने बे महिनां थयां छे

तारा सानिध्यमां तने एम लागतुं नथी के
आपणे कोइ कोलेजकाळनां मित्रो होइए !
साचे तुं स्वपनमां जोयेली कोलेजकाळनी मानुनी बनी 
मारी सामे तादश जिंवत जिंवत बनाववा आवी छे

कदाच मने खबर नथी मारी वीस वर्षने उमरमां
जे कल्पनानी सुंदरी हती ते मने मळी छे,
केटला वर्ष पछी?
"कोलेज छुटी एना लगभग वीस बावीस वर्ष पछी     
कोइना सपना साचा पडे छे ए तो जाणतो हतो    
पण आटला लांबा अरसा पछी साचा पडे त्यारे 
केवुं मजानुं लागे आ बधुं...?"

मे तारा कानमा धीरेथी वाळने हटावीने पुछयुं
त्यारे तारा वाळनी सेम्पुंनी खूश्बू मारा नाक सुधी पहोची
अने ते आछु स्मित लावीने पुछ्यु,
“केम तने बधुं मजानुं लागे छे?”

तने जवाब आपती वखते   
तारा वाळने में काननी पाछळ धकेल्या,
अने मारी मनगमती अदामां नीचुं जोइने मजानुं हसी लीधुं
अने बोली,

“बस!जिंदगीनी साची मजा टूकडे टूकडे मने मळती रही छे
तारा आगमनथी पछी मजाओनां टूकडाओ भरेलो
आखो संदुक मने मळी गयो एवुं लागे छे!"

ते फरीथी मारा मनपंसद हास्यने रेलावता रेलावता
मारा माथे व्हालथी हाथ फेरवता फेरवता कह्युं
“बिलकुल मारो बच्चो,हजुं पण एवोने एवो ज छे
निर्दोष अने लागणीथी नवडावी देवानुं मन थाय एवो ज." 

आम कहीने ते मारुं माथुं छाती सरसुं भींसी दीधुं
ने मारी बंने आंखोमां अकबंध साचवी राखेली नदीनां
बंध खोली नांख्यां
मारी आंखोमाथी नितरतां आसुंथी तारुं टीशर्ट   
खारा पाणीथी भिंजाय गयुं,में जरां माथुं उचुं करीने
तारा चहेरा पर एक नजर नांखी

त्यारे तारी आंखो बंध हती,मोढा पर यौवननां पुरुषार्थना
पाकेला फळ जेवुं मीठू,मस्त मजानुं हास्य हतुं

एने मे तने ढंढोळीने कह्युं”महोतरमां” उठो अंधारुं थइ गयुं
उंघमांथी उठी होय ए रीते एने मने जवाब आप्यो
“चाल,फरी मळीशुं,कयारेक अनायाशे,आ रीते अचानक”
- नरेश के. डॉडीया
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