बधी बाबतमां हुं तारी मनमानी चलावुं Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

बधी बाबतमां हुं तारी मनमानी चलावुं Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
बधी बाबतमां हुं तारी मनमानी चलावुं Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
गजब छे तुं यार!
बधी बाबतमां हुं तारी मनमानी चलावुं

तारी मरजी होय तो मने मेइलनो रीप्लाइ आपे
अने मरजी ना होय तो रीप्लाइ ना पण आपे

तने जरा पण केरे जेवुं नथी…
हुं ज फकत तारा माटे झूर्या करूं

तारी मरजी होय तो फोन करे अने वातो करे
मारे ज्यारे वात करवानो मुड होय त्यारे
सदाय एक ज जवाब मळे छे…

“हुं बीझी छु..थोडुं काम पतावीने सामेथी
हुं फोन करूं छु

अने तुं फ्री थाय छे
पाच-सात के दस दीवस पछी…

अने ज्यारे तारो फोन आवे त्यारे
तुं जरा पण जाणवानी तस्दी ले छे
के हुं क्यां छुं?
कोनी साथे छुं?
किचनमां छुं के बेडरूममां छुं?

बस..तारी मनमानी..
एक ज वात..तारा बधा काम पडता मुक अने
अत्यारे मारी साथे तुं वात कर

तुं जाणे छे…एक वार हुं फोन पर आवी एटले
ओछामां ओछी अडधी कलाक अने वधुंमां वधुं
ओह गोड….यार तुं मने बहुं हेरान करे छे..

हमेंशां तारूं धार्युं करे छे
तारी पोस्टमां तुं केवुं सारूं सारूं लखे छे.
प्रेम एटले आ…
प्रेम एटले ए..
प्रेम एटले फलाणुं..
प्रेम एटले ढीकणुं

अने तुं जे लखे एवी रीते के एवो प्रेम
ते मने कर्यो नथी…अने में कदी अनूभव्यो नथी..

माइ…माइ…कोइक वार माथुं भमी जाय छे
तारी मनमानीथी…आवो ते कांइ प्रेम होतो हशे?

तारी गझलना शेरमां जाणे हुं कोइ देवी होउ
ए रीते मारी भकित करे छे……महोतरमा..महोतरमां…
अने बस महोतरमां….

जाणे कोइ मारो भावक मारी आराधना करतो होय..

तुं पण आखरे तो पुरुष ज छे ने…
-दादागीरी करवी तो तारो हक्क छे ने?
-हमेंशा अधिकारथी वातो करवी..
-मारो प्रोफाइल तने पिक्स ना गमे तो
मारे तुंरत ज बदली नाखवानो..

खबर नही…तारी जोहुकमी पण तारी जेम केम गमे छे??

केम समजतो नथी यार…आने साचे प्रेम कहेवाय..

हवे कविराज तमे समजावो…शुं आ प्रेम कहेवाय??
बोलो….बोलो….जवाब आपो…मने हमणा ने हमणा
जवाब आप…

“अरे..मारी व्हाली..गुस्सामां बीजाओ चहेरो लाल थाय..
अने तारॉ चहेरो गुस्सामां हमेशां गुलाबी थाय छे बच्चा..!!

“ताराने मारा प्रेममां ए ज तो तफावत छे प्रियतम !
तुं अकारण ज मने प्रेम करे छे.
ने मने कारण वगर प्रेम करता आवडतु नथी !”

सांभळ व्हाली….प्रेम छे एटले तो बधी मारी आडॉडाइ
सहन करे छे…
प्रेम छे एटले मने अधिकारभाव जताववो गमे छे अने
तने सहन करवो गमे छे…
प्रेम छे एटले तो तने हुं कहुं एम करवुं गमे छे….
बाकी तो तुं कोइना बापनुं माने एवी नथी…
तने पण खबर छे के तुं केवी वादीली छो?

छतां..पण तुं मारा माटे बधुं खरा दिलथी करे छे…
मारी व्हाली…..मारा माटे प्रेम एटले तुं….अने
तुं एटले मारा माटे प्रेम……

कारणकें तुं मने दुनियानी रस्मोरीवाजोने कोराणे मुकीने प्रेम करे छे
तारी पोतानी दुनियाथी….एक अलग दुनियामां आवीने…

शब्दोनां सेतुं पार करीने आपणी जुदी दुनिया वसावी छे..
ज्या राजा-राणी के प्रजा जे कहे ते आपणे बे ज छीए..”
(नरेश के.डॉडीया)
     
Advertisement