आजे तुं ए स्थाने बिराजमान छो, Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

आजे तुं ए स्थाने बिराजमान छो, Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
आजे तुं ए स्थाने बिराजमान छो, Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
नही समजाय तमारा दिवानानी दिवानगी आपने
आपी छे देवी तरीके बिराजवा परवानगी आपने

आजे तुं ए स्थाने बिराजमान छो,
जे स्थाने अन्य कोइ बिराजमान ना थइ शके,
अन्य कोइ आ स्थान बेसी पण न शके

एक उच्च तब्बक्को छे,आ चाहत नो,
जेनी चरमसिमा छे,
कदाच अन्य कोइ तने चाहे के तुं कोइने चाहे,
कशो फर्क ना पडे के इर्षा जेवुं कशुं थाय.
कारणके हुं जे स्थाने छुं,
ए स्थाननी कल्पना करवी
अन्य माटे कल्पना बहारनो विषय छे.

भले हुं मारा दिवानगीनां केफमा बोलतो होंउ व्हाली,
पण सत्य होय ए सत्य ज रहेवानुं छे.
तारा देवी सानिध्यमां मारामां देवीगुण आवता जाय छे.
इर्षा.खार,द्रेष जेवी वस्तुंओ मारामांथी जाणे अद्रश्य थइ गइ छे.
मानविय गुणॉथी पर आपणी वच्चे इश्वरीय चाहत छे.

रोमांच,आंनद,सर्वोतम सानिध्यनी भेट,
शरीरथी नही पण मनथी सतत आंलिगन करी शकुं छुं,
ह्रदयथी लइ आत्मिय रीते चाही शकुं छुं.
तारी झंखनां करुंने मारी आंख सामे
शब्ददेहे तुं हाजर थइ जाय छे.

ना कोई कोईक ना थी दूर होय छे,
ना कोई कोईक नी नजीक होय छे,
झींदगी पोते ज नजीक लावी दे छे,
जयारे कोई कोईकना नसीबमां होय छे.

मारी कविता अने गझल तारी प्रसादी छे,
लखुं छुं त्यारे एम लागे जाणे हुं कोइ
पवित्र कार्य करी रह्यो एवुं लागे छे,
जाणे दोरामां फुलोने पोरवीने तारा माटे
अक्षरोनी माळा बनावी रह्यो होउं एवुं लागे छे.

अने हुं जाणूं छुं,तारामां ए शोधी काढी छे,
जे सुषुप्त अवस्थामां कोइ दटायेली नदी
जेने अथाग प्रयत्न पछी व्हेती करी छे 
ए बालिस छे,नादान छे,नखरा करवा गमे छे,
जिद करवी गमे छे,अने सहेलावे,एने पटावे,
एने व्हाल करे….

टूंकमां आ मानुनीने बाळक जेवी जिद करवी गमे छे.
अने एक बाळक जेम पारावार प्रेम पण वरसावे 

हा!पण ए बहुं समजदार छे.
अने ए तारुं व्यकितत्व अत्यार सुधी दबायेलुं ज रह्युं छे,
ज्यां सुधी मारा मानवां मुजब कोइ पहोंची शक्युं नथी.

मने एनुं नवुं व्यकितत्व छे ए बहुं गमे छे,
चिरकालिन यौवननां आर्शिवाद पामेली कोइ देवी
साक्षात मारा माटे इश्वरे मोकली होय एवुं लागे छे.

व्हाली महोतरमां !
तने प्रेम करी शकाय,चाही शकाय,
तने जाणी शकाय,तने माणी शकाय,
अने छेल्ले छेल्ले तारा कदमोने चुमी शकाय.

तारी पवित्रतांथी बंधायेलो देह तारुं शारिरक सौंदर्य छे,
काजळनी रेखांथी देदीप्याम ऐश्व्रर्यथी ओपती तारी आखोनी
भाषाने हुं समजतां शीखी गयो छुं.
जे पोतिकुं छे ए ज आ भाषानी लिपि उकेली शके छे.

सपनामां तने विटळाइने व्हाल करतो तारो दिवानो
-नरेश के.डॉडीया
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