रुह की अंदरूनी सफर कां पूरा झाइका लेने के बाद Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

रुह की अंदरूनी सफर कां पूरा झाइका लेने के बाद Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
रुह की अंदरूनी सफर कां पूरा झाइका लेने के बाद Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
रुह की अंदरूनी सफर कां पूरा झाइका लेने के बाद
पूरी दुनिया से अनजान दो लोग
अपनी गुफतगु मे पूरी तरह मशरूफ थे.

उसी वकत घडीने अपने समय को उन दोनो के सामने
बामुलायजा कहके बादशाह की तरह पेश किया.

थोडी देर पहेले जो दो लोग बादशाह बेगम के भेस मे अपने
अपने ख्वाब बुनते जाते थे

उस के हाथ से ख्वाब बुनने के सभी हथियार जैसे के
अपने मोबाइल फोन,मिलने की खुशी के पल, अपनाने के धागे वगेरे.... 
सब वहा छोड के,दोनो अपने अपने काम मे लग गए.

उस के बाद की हक्कीत की दूनिया 
एक मथे पे पसीनो को पोछती हुवी रसोइघर मे औरत
दुसरा ताजी यादो को आंखो मे भर के सोने जा रहां पुरुष
-नरेश के.डॉडीया
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