स्वप्न जेवुं जीववानुं कोकने मळतुं होय छे. Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

स्वप्न जेवुं जीववानुं कोकने मळतुं होय छे. Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
स्वप्न जेवुं जीववानुं कोकने मळतुं होय छे. Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
स्वप्न जेवुं जीववानुं कोकने मळतुं होय छे.
जिंदगीमां सौने गमतुं पात्र क्यां जडतुं होय छे?

कोइना दिलमां वसी जइने तमे जाणी लो भलां
जोजनोनी दूरतां वच्चे ह्रदय हसतुं होय छे

कायमी जकडीने राखे डाळने पंखीओ बधा
न्होरमा जकडाइ जावुं कोइने गमतुं होय छे

प्हेरवाना होय बारे मास जेने कापडनी जेम
श्वासनुं मेचींग जे माणस थकी सजतुं होय छे

रोज फूलोने उघडवानु जरूरी क्या होय छे?
रोज झाकळने अडीने फूल मघमघतुं होय छे

हुं उघाडी लागणी लइने तने अडकुं छु सदा
शब्दना ब्हाने जगत आखुय छेतरतुं होय छे

एक पालव मात्र तारो केम माफक आवे मने?
पात्रता भाळीने पालवनुं मन सळवळतुं होय छे

मयनो तुं आस्वाद भूलावी चडी गइ एवी मने
सांजनां आदत मूजब मन मारु तरफडतुं होय छे

नाक नकशी,नेण कजरारा ने मनगमतु मानवी
आ”महोतरमां”मां शोधो तो धणुं वधतुं होय छे
-नरेश के.डॉडीया   
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