हुं खुदने पण क्यारेक समजातो नथी Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia

हुं खुदने पण क्यारेक समजातो नथी Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
हुं खुदने पण क्यारेक समजातो नथी Gujarati Gazal By Naresh K. Dodia
हुं खुदने पण क्यारेक समजातो नथी
भीतर लगी कोइमां पडघातो नथी

मुकितने बंधननी मायाथी पर थई
हुं मोहमां ताराय भरमातो नथी

वागे घणुं भीतरमां आजे बे-सुरुं
किरतारनो ए तार छेडातो नथी

इश्वर नथी के छे? विचारी शुं करुं
मारी नजरमां कोइ देखातो नथी

तारी हकीकत केम प्हेरीने फरूं?
हु कोइना मापे ज सीवातो नथी

जंगलमां रस्ता भूलवांमा छे मजां
आवासनी केदमां सपडातो नथी

तारा-पणाना ख्यालमांथी ब्हार छुं
पण अन्यनां ख्यालोमां हुं जातो नथी

जीवन-सफरनो अंत नक्की होय ज्यां
हुं काव्य मरसीया समां गातो नथी

तादाद भारी छे खूशीनी शब्दमां
मारी गझलने दर्दथी नातो नथी

मारी “महोतरमाने” चाही शुं मळ्युं
ताळॉ ए माराथीय मंडातो नथी
– नरेश के. डॉडीया

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