ना..ना..आवुं कशुं मारे नथी करवु. Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia

ना..ना..आवुं कशुं मारे नथी करवु. Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
ना..ना..आवुं कशुं मारे नथी करवु. Gujarati Kavita By Naresh K. Dodia
- मारुं पंचोतेरमुं वर्ष - 
ज्यारे हुं पचोतेर वर्षनो थइश 
त्यारे हुं पनामां हेट पहेरीने  
काळा चश्मां लगावीने फोटॉ पडावीश 
ए फोटॉ प्रोफाइलमां अपडेट करीश 
    
ध्रुजतां हाथे नव कविओनी रचनाओनी
मारी कविताओमां अने पोस्टमां
खील्ली उडावतो होइश 

कोइ वानप्रस्थ अवस्था अने चालीसी वच्चेनी
स्त्री मित्र मने अंकल कहेशे तो हुं एनां इनबोक्समां जइने
जाणे हुं एनो कोलेज मित्र होंउ ए रीते दलील करीश 
हुं क्यां अंकल जेवो लागुं छुं.

कदाच खबर नही त्यारे हुं क्यां होइश 
संतानो विदेश स्थाइ हशे तो एनी माथे रहीश 
अथवां तो देशमां खोखली हालतमां पडयो होइश 
तोये मारो कवि जीव तो अभरखाओनी पथारीमां
आळॉटतो हशे..

ना..ना..आवुं कशुं मारे नथी करवु.
बस एक तंदुरस्त मोत जोइए छे
साठी पछी  
एक मस्त मजानी
भीनी भीनी नीतरती सांज जेवी
वर्षावनोनी खूश्बुथी तरबतर 
रोमेन्टीक गझल के कवितां  लखतां लखतां
यमराज साथे एक दोस्तनी कारमां
बेसीने पिकनिक के बारमां जवानुं होय 
ए रीते नीकळी पडीश.
- नरेश के. डॉडीया    
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