पंसदगीना भरपूर अवकाश वच्चे सुख शोधवा जवु Quote By Naresh K. Dodia

पंसदगीना भरपूर अवकाश वच्चे सुख शोधवा जवु Quote By Naresh K. Dodia
पंसदगीना भरपूर अवकाश वच्चे सुख शोधवा जवु Quote By Naresh K. Dodia
पंसदगीना भरपूर अवकाश वच्चे सुख शोधवा जवु ए पण कळा छे...समयनां गर्भमां केटलु केटलु आपणे साचवीने राखीए छीए....जीवनक्रम सतत चालतो आवे छे.रोजिंदा जीवनमां एक सांत्वन आपनारो अने सांभळीने संभाळ लेनारो अने वात कहेता पहेला वातनी सार समजनारो एक मानसिक सहारो हर एक मानवीने क्यारेक जरूर पडे छे...त्यारे पंसदगीना अवकाश वच्चे मगजने बहु महेनत कराव्या विना दिलनी सांभळो...आ पंसदगीना अवकाशमां एक चहेरो साव अलग तरी आवतो देखाशे..कारणके आ क्रिया दिलनी आंखोथी जोवानी छे अने ए व्यकितनी पंसदगी आंखो बंध करीने करी लो....अने आजीवन मनना भारने एक बीजाना सहारे हळवा करता रहो
प्रेम,पाणी अने पवनने सतत वहेवानो मार्ग जोइए छे...ए गमे तेवी तीराडमांथी पोतानी वहेवानो मार्ग शोधी ले छे....
ज्यारे पाणी अने हवा प्रवेशे छे त्यारे ए तीराडॉने पहोळी बनावी नाखे छे...जेने सांधवी अशक्य छे...
ज्यारे प्रेम ए तीराडमां प्रवेशे त्यारे,प्रेवेशीने पहेलुं काम ए तीराडने सांधवानु करे छे अने त्यार बाद ए आगळ वधे छे..
-नरेश के.डॉडीया
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