ये कहकशा सी दिलकश आवाज Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

ये कहकशा सी दिलकश आवाज Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
ये कहकशा सी दिलकश आवाज Hindi Kavita By Naresh K. Dodia 
तेरी नर्म मुलायम बाहे
तेरी मखमली सी पनाह
तेरी शरबती आंखे
ये गौर लचिला बदन
युं तेरा बच्चो जैसा मुस्कुराना
  
क्युं मुझे गुस्ताखिया करने पर मजबूर करता है

तेरी पनाह मे 
चाहते है…
राहते है…
शुकुन है

मै सोचता हुं…
तुझ मे क्यां कयां नही है

ये कहकशा सी दिलकश आवाज
जब भी फोन पें दो मिनिट कां वक्त है बोलकर 
घंटो भर मुझ से बाते करती है तो
लगता है कोइ परिंदा तरन्नुम में
अपने साथी को आवाझ दे रहा है

बस यही तेरा हुन्नर तुजे मशहुर करता है
जब भी लिखने को दिल करता है
तेरा ख्याल अपने आप दिल ओ दिमाग पे आ जाता है

फिर तो क्यां…
तेरे ख्यालो के समंदर मे डुब के
मेरी शेर शायरी को सजाने के लिए
एक से एक चमकीले
अलफाजो के मोतीओ को ढुंढकर लाता हुं

बस तेरा सामने होना या
नजरो से दूर रहेना
सिर्फ तेरा अहेसास ही
मुझे तेरे नशे मे मुजे मशरूफ रखता है

और”महोतरमा” तेर नाम से मेरा नाम जुडना
मुझे मशहुर करता है
(नरेश के.डॉडीया)
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