वो अल्लड और कमसिन गुफतगु की मौत हो गइ.Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

वो अल्लड और कमसिन गुफतगु की मौत हो गइ.Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
वो अल्लड और कमसिन गुफतगु की मौत हो गइ.Hindi Kavita By Naresh K. Dodia  
कुछ अरसे पहले की बात है
हमारा रोज मिलनां जुलनां लगभग तय होतां था
शाम के घने सांये उतर आते थे
और मुझमें उस की रोशनी उतर आती थी
मुझे अच्छी तरह मालुम है
हमारी गुफतगु की कभी रात नही ढली
ना हमारी गुफतगु की उम्र मे बढॉत्री हुवी
नां कभी गुफतगुके चहेरे पे शिकन देखी
नां उस के झडे हुवे सफेद बाल देखे         

एक दिन अचानक क्यां हुवां
उस वकत शाम नही थी
जलती हुवी दोपहरी थी
सुरज की जवानी पूरजोश में थी
वो दुप्पटे में अपनां मुह छुपाके आइ
और कुछ बोले बिनां उस ने एक 
लिफाफा मेरे हाथ मे थमां दिया
और बोली के मेरे जाने के बाद तुम पढ लेनां

मैने एक पेड की छांव में नीचे उस का दिया
लिफाफा खोला और पढा

एक ही लाइन में उस ने
हमारी गुफतगु की मौत की खबर लिखी थी
लिखा था,"आज के बाद हम कभी नही मिलेंगे
और ना कभी हम से बात होगी."

में यहा से बहुंत दूर जा रही हुं
जहां कां सूरज हमारे देश का सूरज ढलने के बाद निकलतां है
और वहां कां चांद हमारे देश कां चांद ढलने के बाद निकलतां है

एक जवान,जिसको किसी ने छुआं तक नही
वो अल्लड और कमसिन गुफतगु की मौत हो गइ.            
और खामोसी की कब्र में उस को मैने अपने हाथो से
दफन कर दिया.
- नरेश के.डॉडीया  
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