हा, मैने प्रेम के बारे मै बहुत कुछ लिक्खा है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

हा, मैने प्रेम के बारे मै बहुत कुछ लिक्खा है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
हा, मैने प्रेम के बारे मै बहुत कुछ लिक्खा है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
प्रेम 
हा, मैने प्रेम के बारे मै बहुत कुछ लिक्खा है
कितनी गजले
कितनी कविताए
कुछ कहानीया
कुछ प्रेम पत्र लिक्खे है
लेकिन मैने कभी हकीकत मे प्रेम की
सच्ची अनुभूति किसी से महेसुस नही की थी
यह सब कल्पनाओ के दोर मे गुझरकेने बाद 
जो रुह को महेसुस हुआं वो मैने कागज पे
लिख दिया..
लेकिन आधी जिंदगी चली गइ और एक दिन 
आप से मेरी मुलाकात हो गइ...और...
मुलाकातो का सिलसिला चलतां रहा...
इसी  दौरान हम दोस्ती के मेदान से आगे
प्रेम के घने जंगल मे पहोच गये

अब इस घने जंगल में हम दोनो भटक रहे है
जिस की कोइ मंजिल नहीं है
लेकीन हा....
दिन मे एक दो बार 
जब भी हमदोनो आमने सामने हो जाते है
कुछ घंटे एक साथ बेठ जाते है
कुछ कविताए,नजमे,गजले और 
थोडी इश्क की नुमाइश मै         
मंजिल कां झायका समजकर 
रुह की तृप्ति का अहेसास भर के 
हम दोनो फिर निकल पडते है
इश्क के जंगल में
जिस की कोइ मंजिल नही है
- नरेश के. डॉडीया                                        

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