मेरे चहेरे पे रात रात भर निगाहे जमाता था Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

मेरे चहेरे पे रात रात भर निगाहे जमाता था Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
मेरे चहेरे पे रात रात भर निगाहे जमाता था Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
मेरे चहेरे पे रात रात भर निगाहे जमाता था
जैसे आंखो से दिल का रास्ता वो सजाता था

मेरे बालो को अपने
हाथो से उलजाता रहता था
जैसे कोइ बादल हवा के
साथ इश्क लडाता था

मेरे साने पे रातभर
वोह सर रख के सोता था
जैसे अजीब तरीके से
मुझे ख्वाब दिखाता था

उस की मौजुदगी निंद को दुर खिंच लेती थी
जैसे मेरी सांसो को अजीब खुश्बु पिलाता था

वो शोख लम्हो का पता 
लिख देता था गालो पे
जैसे शौकिन भंवरां 
ताजी कली को लुभाता था

मुज पे एक तरफा कयामत का
असर डाला था
उन की गैरमौजुदगीमे
आंखोमे वो चेन से सोता था

आया था मेरी पनाह मे संमदर का गुरुर भर के
आहिस्ता आहिस्ता फिर उन का गुरुर उतरता था
- नरेश के. डॉडीया
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