कुछ हिंदी शेर - By नरेश के. डॉडीया

कुछ हिंदी शेर - By नरेश के. डॉडीया
कुछ हिंदी शेर - By नरेश के. डॉडीया 
एहसास का हमने जखीरा सामने उस के युं रख दिया
मैने भरी महेफील मैं इक शेर उस नाम से पढ दिया 

एहसास उस को है मगर उतना नहीं 
सागर हूं मैं फिर भी उसे डूबना नहीं

सुनामी की तरह आती हे मेरे ख्वाब मे अकसर
कहर उस शब का सुबहा तक मुझे लिपटा रहेता है.

ख्वाब को मेरी तरह तुं आख मे भर के देखले
इश्क जो मैने किया है,इस तरह कर के देखले

एहसास की मानिंद हर अलफाज उस का जिक्र करता है 
कोइ है जो  दुनिया में अपने से भी ज्यादा फ़िक्र करता है 

हादसा जो इश्क वाला देख के उस को हो गया
आंख क्यां उसने मिलाइ आंख मे उस की खो गया 

कभी तुं दोस्त कहती है,कभी तुं यार कहती है 
नदी ऐसी हैं तुं सागर के दिल से दूर बहती है

दीदार जब-जब आप की तसवीर का मे करता हुं
रब की कसम मे आपको पाने-वाले से जलता हुं

मेरे सिने में छूप के रोने की आदत हो गइ है
जैसे कभी मुझ को मिली ना हो वो दावत हो गइ है                       

चल शको तो साथ मेरे चांद तक चलो
वक्त की गर हो कमी तो शाम तक चलो 

किसी को चाहने के माइने जानो
पता गुलशन का उस कां धर बताता हुं

शामकी तनहाइ मे तुं कयुं नही है
इश्क का अंजांम दुनिया मे यही है
- नरेश के. डॉडीया 
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