में तुझे सरेआम चाहुं तो लोग कयुं परेसान है? Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

में तुझे सरेआम चाहुं तो लोग कयुं परेसान है?  Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
में तुझे सरेआम चाहुं तो लोग कयुं परेसान है?  Hindi Kavita By Naresh K. Dodia   
में तुझे सरेआम चाहुं तो लोग कयुं परेसान है?   
सिर्फ तुझे चाहुं,ये तेरी चाहत की पहेचान है 
तेरी रानाइ,घने बाल,तेरी मासुमियत कया है?
ये काफी नही है,तुझे चाहना खुदाइ फरमान है

सिर्फ चाहना,गजले लिखना मेरी फितरत नही
जान ए हयात,इसे भी और ज्यादा अरमान है
तेरी मगरूरी मुझे बेंइंतिहा पंसद आने लगी है
सलिके से चाहत जतानां ही मेरां इंम्तिहान है 

कोइ फर्क नही पडता,कभी कभी रूठ जाने से
जनाना को मिन्नते करना भी मर्दो का मान है
जश्न कयां होता है,तेरी गुफतुगु के बाद जाना
तुझ से दो बाते हो,मे समजता हुं मेरी शान है

बडे जोरो से चचे चलते है’महोतरमा’कोन है?
तेरा नाम नरेन की गजलो की सही पहेचान है
माना के तुझे पाना इतना आसान तो नही था
पता चला मेरी अंदर बसनेवाली तुं मेरी जान है

महोतरमां बडा अच्छा लगता है तेरी पनाह मे
जैसे राधा की बाहो में लपकां हुआ कान है          
- नरेश के.डॉडीया
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