जो अंधेरे के डर से रात भर जलता नहीं है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

जो अंधेरे के डर से रात भर जलता नहीं है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
जो अंधेरे के डर से रात भर जलता नहीं है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
जो अंधेरे के डर से रात भर जलता नहीं है
वो सब बुड्ढे चरागे कां कही चर्चा नहीं है.

तुम्हारे साथमे तेरे शहर आ शकतां हुं में
हमारे साथ चलने कां तेरा रुत्बां नही है

खिलोनो की तरह देरो-हरम बिखरे पडे है
वहीं पे कोई हसता खेलता बच्चा नहीं है

पुरानी वो हवेली में जो बुड्ढा रहता है आज
सुना है उस के बच्चो को अभी परवा नहीं है

वो प्यासे की जरूरत क्यां है जो बादल ना समजे
जो प्यासा बन के सहरा में कभी भटकां नही है

बडी लंबी उडाने भर के भर के थक चुका है
परिंदे हैं उसी की पंखमे पूर्जा नही है

किताबे इश्क की पढने नहीं देता है वो शख्स
उसे कैसे में कहुं उस के बगर चारा नही हैं

अमन की बात उसकी सुन के में तो थक चुकां हुं
मगर उन कां ही उन के भाइ से रिश्ता नही है

“महोतरमां” यहा कितनी दिवानी मेरी है आज
मगर तेरी तरह किसी का भी अशनां नही है
– नरेश के.डोडीया
*अशना – नखरे

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