कुछ वक्त पहेले जिस की मंजील एक थी. Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

कुछ वक्त पहेले जिस की मंजील एक थी. Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
कुछ वक्त पहेले जिस की मंजील एक थी. Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
एक वक्त था जब हम दोनो
घडी की सुइओ की तरह 
चोवीस धंटे में कितनी बार   
इक दुसरे से चिपक के 
साथ साथ चलते थे            

एक दिन क्यां हुवां 
वो धडी बिगड गइ,
जो आज तक उस की मरामत नही हो पाइ 

आज हम दोनो वक्त की आंधी में
खोये हुवे दो अलग अलग मुसाफीर की तरह 
अपनी अपनी मंजिल की तलाश में भटक रहे है

कुछ वक्त पहेले जिस की मंजील एक थी.
- नरेश के. डॉडीया 
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