मेरे प्रेम के आगे देश प्रेम जित जाता है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia


मेरे प्रेम के आगे देश प्रेम जित जाता है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
मेरे प्रेम के आगे देश प्रेम जित जाता है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
इतिहास गवाह है 
दो सच्चे प्रेम करनेवालो की तकदीर से
दूरीया की लकिरे बेलो की तरह लिपटी होती है           

पहेले तो आंखो से दूर बसनेवालो के हम   
खतो के जरिये मिलते रहते थे.
और हमे पता थां की
जब तक आंखो के सामने वो ना आये
तब तक दूरीया खतम नही होती थी.

लेकिन अब नया जमानां है
दूरसंचार नये नये गेजेट दूरी में रहनेवालो को
हमेशां नजदिक रखते है

हकीकत ये है ये सब हमे बहुत परेसान करते है
में कितने दोस्तो और धरवालो के बिच रहती हुं
फिर भी उन के बगर जो अकेलेपन का श्राप है
वो मेरे साथ रहतां है

जब भी मे अकेली हाथ में मोबाइल लेकर बेठती हुं
शायद वो मुझसे बात करे इसी उम्मीद मुझे बारी बारी
मेरी आंखो में आसुं लाती है

कयुं की वो कोइ आम इंसान नही है
वो हिंंदुस्तानी सेनां का सिपाइ है
अगर आम इंसान होतां तो 
वो अपनी ओफिस के काम से
थोडा सा समय निकाल के मुझ से बात करतां

ओफिस की और देश की जिम्मेदारी मे शायद 
ये ही फर्क है...

दोनो जगह प्रेम है
एक मेरे लिए और एक देश के लिए
लेकिन मेरे प्रेम के आगे देश प्रेम जित जाता है
मुझे इसी बात पे फक्र है
के मुझे चाहनेवालां मुझ से ज्यादा 
अपने देश से प्यार करतां है..
-नरेश के.डॉडीया
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