जख्म जब गहरा हो तो उस का मजा कुछ और है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

जख्म जब गहरा हो तो उस का मजा कुछ और है  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

जख्म जब गहरा हो तो उस का मजा कुछ और है
इस लिए मेरी गजल कां दबदबा कुछ और है

ये सुफी अंदाज मुझ को बहुत अच्छा लगतां है
इश्क में मुझ को लगां मेरां खुदां कुछ और है

जाम तो कितनी किसम के मे पीता रहतां यहां
आप की आंखो से जो छलकां नशा कुछ और है

रात को मुझ को बुलातां है दूरी से कोन है?
पास जाकर देखुं तो उसकी सदा कुछ और है

हाथ भी पकडे नहीं वो साथ भी छोडे नहींं
इश्क की राहे-सफर का फलसफा कुछ और है

होठ उस के देख के तबियत मचल जाती है क्युं?
वो दबे होठो से हसने की अदा कुछ और है

इश्क करने से यहा सब लोग डरते हैं मगर
जो गजल मेरी पढे तो मशवरा कुछ और है


ये महोतरमां के लब पे जब से मेरां नाम है
मीसरी जैसी जुबां पे जायकां कुछ और है
– नरेश के.डॉडीया
Advertisement