कुछ बाते,मुलाकाते की यादे फिर से मुझे सताती है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

कुछ बाते,मुलाकाते की यादे फिर से मुझे सताती है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia
कुछ बाते,मुलाकाते की यादे फिर से मुझे सताती है
वही पूरानी यादो की रंगत फिर आज मुझे बुलाती है
कयुं ये दिल नही भरता,तेरी रोज की मुलाकातो से?
जरा सी भी तेरी दूरी मेरी आंखो को कयुं रुलाती है

नहीं समज शकता हुं में तेरी चाहत की गहेराइ को?
एक छोटी सी गुफतुगुं चाहत के संमदर में डुबाती है
मुझे बडा गुमान रहेता थां मेरी खुद की फितरत पे!
जब भी तुं सामने आयी,जात सजदे-सर जुकाती है

परींदे के परो सी मुलायम है तेरी पनाह,महोतरमां
तेरी खातिरदारी!जैसे मां बच्चे को गोद मे सुलाती है
बडा फक्र है तेरी रानाइ और कुछ चाहिते अंदाज पे
दिल में गुल खिलते है जब तुं सामने मुश्कुराती है

एक ही मुलाकातने महोब्बत का जैसे समां बांधा है
जान ए हयात,तुं कितने तरीके से चाहत जताती है
बडे सलिके से तुने मुजे इतना फिक्रंमंद बना दिया!
तुझे ऐसे मनावुं,जैसे दुल्हन सेज पे फुल बिछाती है

महोतरमां,जब भी मिलती हो,बडा शुकुन मिलता है
तेरे लिबासो के जैसी मेरी गजले नये रंग सजाती है
- नरेश के.डॉडीया
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