तुम्हारे ख्याल हर वकत मेरे दिल को ऐसे छुते है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia

तुम्हारे ख्याल हर वकत मेरे दिल को ऐसे छुते है Hindi Kavita By Naresh K. Dodia 
तुम्हारे ख्याल हर वकत मेरे दिल को ऐसे छुते है
जैसे शबनम सुबह को मासुम गुलो को चुमते है
चाहत हो या सजदे,बंदो का अंदाज ए इश्क नेक है
सनम हो या खुदा सर उस की चोकट पे जुकते है

जश्न ए बारात हो,या जुदाइ का गम,तो क्यां हुवा?
हिज्र की शब हो या बिरह की रात मे सदा जुमते है
मिलना,बीछडना,फिर मिलना,ये कैसा सिलसिला है
चाहनेवालो के सितारे तो अकसर गर्दीश में डुबते है

ख्वाब या,बिजली के तार कभी ना तुटे ये दुआ करे
आंखो के सामने अंधेरा होता है,जब दोनो तुटते है
सनम मिले तो खुदाइ है,ना मिले तो जुदाइ तो है!
अगर दोनो नां मिलते तो जिंदगी के राझ खुलते है

दरिया की प्यास जब शहेरो-गलीओ में पहोचती है
शाहिल से लोटी नदी को,दरिये गलीओ में ढुंढते है
शहेझादी से हुर तक,ये शायरो चाहते जताते रहेते है
सच्चा इश्क हो,तो खुदा कि स्मत के धागे बुनते है

कयुं करते हैं दोस्ती से लेके मुहोब्बत जिंदगी में सब   
खुशी मिले या गम,रिश्तो से लोग अकसर जुडते है
अमीर से शायर की अदाकारी बाखुबी निभाइ है’नरेन’
हमारे जल्वे देखने,आज भी हुस्न के पांव रुक़ते है
- नरेश के.डॉडीया
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