कुछ हिंदी शेर - By नरेश के. डॉडीया

कुछ हिंदी शेर - By  नरेश के. डॉडीया
कुछ हिंदी शेर - By  नरेश के. डॉडीया  
तेरे शाने पे सर रख के मुझको सो जाना है 
मुझको तेरी जुल्फो के सांये में खो जाना है 

चूडियाँ ही चूडियाँ हाथ में पहनी थी उसने जो
कहा से पकडु उनको ख्याल उनके होठ पर अटका 

ना जाने कौन सा चहेरा हमारे साथ चलता है 
मुझे मालूम है खुद को अपने घर में छोड आया हूँ 

होठ उस के देख के तबियत मचल जाती है क्युं?
वो दबे होठो से हसने की अदा कुछ और है

हमारे पास आना है तो खुल्लेआम आ जाना
हमारा नाम ही काफी है मगरुर होने के लिए.

मिल के भी तू मिलती नहीं  चाहता हूँ जैसे
तेरे इसी तेवर ने हम से फासला रक्खा है

जिस के लिए बांहे मेरी रो रही है    
मेरी नजर से दूर कही सो रही है    

जाम तो कितनी किसम के मे पीता रहतां यहां 
आप की आंखो से जो छलकां नशा कुछ और है

बदन की तेरी खुश्बुं को छुंआ तब से              
मेरी सांसो मे संदल के तराने है  

तुम को में जब ध्यान से देखुं तो   
लगता है की चांद तो गहनां है
- नरेश के. डोडीया
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