पुराने खत का पढना हम को अच्छा लगता है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

पुराने खत का पढना हम को अच्छा लगता है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
पुराने खत का पढना हम को अच्छा लगता है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
पुराने खत का पढना हम को अच्छा लगता है
कभी भी पढ शके एसा ये कलमा लगता है

खूशी जितनी मिले खैरात समजो उस को तुंम
यहां हर शख्स अपनो से उलजां लगतां हैं

हमारी बात है तो बिच मे ना कोइ आए
हमार इश्क सब को अपनां मसला लगतां हैं

जमाने से चली आती रीवायत है ये इश्क
तुम्हार इश्क में क्यां रोज तडका लगतां है

पुराने दोस्त जब करते है तेरी बाते तो
कभी भी खत्म ना हो ऐसा किस्सा लगता है

सुलगती रात होती है तुम्हारी यादो मे
बेचैनी का यहा हर लम्स जलता लगता है

किसी से दिल लगाकर छोड देता है हर शख्स
जिसे छोडा है जिवन उस को सहरा लगतां है

हमारी बात है तो बिच मे ना कोइ आए
हमार इश्क सब को अपनां मसला लगतां हैं

महोतरमां तुम्हारी चाह मे उलजे है हम
कभी खूशी कभी गम दोनो अपना लगतां है
– नरेश के.डॉडीया

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