अपने वहम को पाल रखने में बड़ा जोखिम है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

अपने वहम को पाल रखने में बड़ा जोखिम है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
अपने वहम को पाल रखने में बड़ा जोखिम है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
अपने वहम को पाल रखने में बड़ा जोखिम है
उस शख्स से अब चाह रखने में बड़ा जोखिम है

बरसो पूराना ख्वाब वो मेरा पूरां नां हुआं
निंदो से ताल्लुकात रखने में बडा जोखिम है

महेमां जहा आता नां हो,ना उसकी खातिर होती                 
व्हा पे दिवानेखास रखने में बडा जोखिम है    

दिल मे छुपा के मुझ को रखने की कसम खाइ थी
उस के सिने पे हाथ रखने में बडां जोखिम हैं

ये इश्कने मुझ को खुदा से भी जुदा कर दिया
अब बंदगी पे ध्यान रखनें में बडा जोखिम है

उस धरकी लडकी गुलबदन सी लगती है बरसो से              
उस धर मे अब गुलदान रखने मे बडा जोखिम है         

तूटां हुआ रीश्ता हमारा फिर से जुड जाएगां
ऐसे ये रीश्तो पे नाज रखने में बडा जोखिम हैं

मेरे पूराने यार मुझ को याद करते है क्हा?
ऐसी जगह पे पांव रखने में बडा जोखिम हैं

मेरी महोतरमा मुझ को जब से यहां छोडा है
उस को गजल में याद रखनें में बडां जोखिम है
– नरेश के.डॉडीया
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