तुं मेरी हैं मगर मेरी कभी लगती नही हैं Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

तुं मेरी हैं मगर मेरी कभी लगती नही हैं  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
तुं मेरी हैं मगर मेरी कभी लगती नही हैं  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
तुं मेरी हैं मगर मेरी कभी लगती नही हैं
नदी ऐसी है सागर से कभी मिलती नही है

तुं धडकन है मेरे दिल की मगर धडकी नही हैं
हकीकत है मगर खारीज तुम करती नही हैं

अगर तुं खीडकी हैं तो हवा बन जांउंगां मैं
में दस्तक जितनी भीं दुं तुंम कभी खुलती नही हैं

तुम्हे दिल से निकाले भी तो कैसे हम निकाले
ये दिल खाली मकां है व्हां पे तुम रहती नही हैं

मेरी हर इक गजल में नाम तेरा ही आता है
बडा ताज्जुब है क्युं ऐसी गजल पढती नही हैं

हमारे दर्द की दास्तां तुम्हे कैसे सुनाये?
तुं अपने आप से बाहर भी नीकलती नही हैं

तुम्हे भारी पडेगा इक ना इक दिन याद रखनां
भूला दुंगां तुम्हे जिस से मेरी बनती नही हैं

महोतरमां गुजारो शाम मेरे साथ मे तुंम
तुं भी कहेगी मेरी ये जिंदगी कटती नही है
– नरेश के.डॉडीया
Advertisement