शाम होते ही में तेरी याद में शामिल होता हूँ Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

शाम होते ही में तेरी याद में शामिल होता हूँ  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
शाम होते ही में तेरी याद में शामिल होता हूँ  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia 
शाम होते ही में तेरी याद में शामिल होता हूँ 
फिर सुबह होते ही अपने आप में दाखिल होता हूँ 

कोइ तुझ सा जब मुझे मिलता नही हैं वो आलम में          
फिर मैं अपने आप की खिदमत में इक महफिल होतां हूं            

चाहु किस किस को यहां कितनी दिवानी हैं मेरी आज            
बात सच हैं सिर्फ तुझ को दिल से मैं हांसिल होतां हूँ            

तुझ से मिलने से मुकर जाता हुं तब बचने के लिए                
खुदको रीहा करने में अपनां ही खुद आदिल होतां हूँ           

शाम होते ही परींदे लौट आते है अपने धर      
याद में तेरी कभी धर जाने से गाफिल होतां हूँ            

ढूंढ मत दुनिया मे कोइ ना मिलेगां मैरे जैसा                   
एक ही ऐसा शख्स हुं जों इश्क में काबिल होतां हूँ       

ये महोतरमां के दिल को पढनां इतनां मुश्किल है              
लगतां है इस मामलेमें मैं ही इक जाहिल होतां हूँ        
- नरेश के. डोडीया
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