कोई तो ऐसी जगह होगी जहाँ तुंम मिलते हो Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

कोई तो ऐसी जगह होगी जहाँ तुंम मिलते हो  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
कोई तो ऐसी जगह होगी जहाँ तुंम मिलते हो  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
कोई तो ऐसी जगह होगी जहाँ तुंम मिलते हो
कयां खबर थी दिल में मेरे सिर्फ तुंम ही रहते हो

लोग भी कितने यहा पागल नजर आते है
कोइ बोलां कोन है जिस के लिए तुंम लिखते हो

एक खातुन के लिए शायर बने बेठे हो तुंम
उस मे ऐसा क्यां है की,रब की तरह तुंम पूजते हो?

आज की ताजा खबर क्यां है तुम्हे मालुम नहीं?
तुं सुनो,निंदो मे भी अपनी गजल को पढते हो

एक पूरानां वाक्या मुझ को याद आयां था अभी
क्यां अभी भी याद मेरी आए तो तुम हसते हो?

इक परी जैसी थी जब मुझ को मिली प्हेली दफा
आज मिल गइ तो पूछा,अब क्युं जमी पे फिरते हो?

तुं हमारे हाथ से फिसला हुआं इक वक्त थां
फिर भी कयुं तुम हाथ मेरा अपने लब से चुमते हो

कितने सालो से महोतरमां तुम्हे देखा नहीं
आंख मे ऐसी बे-सबरी है की,कैसे दिखते हो?
– नरेश के. डोडीया

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