चंद दाने डाल के इक पंक्षी को अपना बनाया जाता है Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

चंद दाने डाल के इक पंक्षी को अपना बनाया जाता है  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
चंद दाने डाल के इक पंक्षी को अपना बनाया जाता है  Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
चंद दाने डाल के इक पंक्षी को अपना बनाया जाता है
बाद उस को जाल में अपनी तरीके से फसाया जाता है

दिल की बातो को कागज पे कहो कैसे उतारा जाता है
एक शायर जानता है लब्झ मे भी जान फुंका जातां है

चांद को अपनी हथेली पे दिखाना शीख लो फिर देख लो
इस तरह से आसमां वालो को धरती पे उतारा जाता है

बेतुकी बाते तुम्हारी कान से ऐसे निकल जाती है दोस्त
घर से जैसे बिनबुलाये कोइ महेमां को निकाला जाता है

शाम होते ही हमारी वाट लग जाती है तेरी यादो में
ये अकेलापन हमारे हाल पे ताना सुनातां जाता हैं

उम्र कट गइ इश्क के किस्से यहां लोगो के सुनते सुनते ही
बात अपनी आइ तेरा नाम लोगो के मुह पे आ जातां है

कितनी दिलकश आपकी तस्वीर है रबने बनांइ है बोलो?
उसने कहां आशिक की नजरो का हुन्नर उस को माना जातां है

अब महोतरमां हमारे हाल पे थोडी नजर डालीए आज
बांह मे लेलो मुझे,फिर जानो कैसे दर्द बांटा जातां है
– नरेश के. डोडीया
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