जुंबा पे तेरी जब दास्तान आती हैं Hindi Gazal By Naresh K. Dodia

जुंबा पे तेरी जब दास्तान आती हैं Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
जुंबा पे तेरी जब दास्तान आती हैं Hindi Gazal By Naresh K. Dodia
जुंबा पे तेरी जब दास्तान आती हैं 
मेरे होठो पे नइ मुस्कान आती हैं 

गजल में रोज नइ इमकान आती है
तुम्हारे नाम से जब दाद आती हैं     

मै जब रातो में गहरी नींद सोता हुं 
कहीं से यादो की बारात आती हैं 

                           शुकुन मिलता था तबियत जब बिगडती थी                                
तुम्हे छूने से राहत खास आती है   

पूराने दौर के किस्से मे मशरुफ हुं             
जहन में कल की बाते आज आती है         

मुझे अफसोस इतनां हैं में कहुं कैसे?          
कहानी मेरी तुंम कयुं साथ आती है?  

जुबानी चर्चे जब अलफाज में डाले    
गजल मे कही से जलती आग आती है       

महोतरमां पूरी कर दो अधूरी शाम             
अकेलेपन की अब फरियाद आती है    
- नरेश के. डोडीया
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